मधुराष्टकं

अधरं मधुरं वदनं मधुरं नयनं मधुरं हसितं मधुरम् । हृदयं मधुरं गमनं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥ १ ॥ वचनं मधुरं चरितं मधुरं वसनं मधुरं वलितं मधुरम् । चलितं मधुरं भ्रमितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥ २ ॥ वेणु-र्मधुरो रेणु-र्मधुरः पाणि-र्मधुरः पादौ मधुरौ । नृत्यं मधुरं सख्यं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥ ३ ॥ गीतं मधुरं पीतं मधुरं […]

*_मुंशी प्रेमचंद जी की एक सुंदर कविता_*

🐋 _ख्वाहिश नहीं मुझे_ _मशहूर होने की,”_ _आप मुझे पहचानते हो_ _बस इतना ही काफी है।_ _अच्छे ने अच्छा और_ _बुरे ने बुरा जाना मुझे,_ _जिसकी जितनी जरूरत थी_ _उसने उतना ही पहचाना मुझे!_ _जिन्दगी का फलसफा भी_ _कितना अजीब है,_ _शामें कटती नहीं और_ _साल गुजरते चले जा रहे हैं!_ _एक अजीब सी_ _’दौड़’ […]

*गुलजार साहब की एक सुंदर कविता*

*गुलजार साहब की एक सुंदर कविता* जिन्दगी की दौड़ में, तजुर्बा कच्चा ही रह गया…। हम सीख न पाये ‘फरेब’ और दिल बच्चा ही रह गया…। बचपन में जहां चाहा हँस लेते थे, जहां चाहा रो लेते थे…। पर अब मुस्कान को तमीज़ चाहिए और आंसुओ को तन्हाई..। हम भी मुस्कराते थे कभी बेपरवाह अन्दाज़ […]

किसी को समझ नहीं आती

चाहतों खत्म नहीं होती मुसीबतें यूं ही बढ़ जाती है, Mails खत्म नहीं होती data input PPT में बढ़ जाती है, Increment और bonus मिल नहीं पाते नौकरी खतरे में पड़ जाती है। कितनी भी मेहनत कर लो तुम growth किसी और को मिल ही जाती है, मेहनत करने वालों की कद्र नहीं होती जी […]

मेरा कोई भी दोस्त* *बूढ़ा नहीं हुआ….!

** सच्चाई में ढ़ले हैं , सब अब भी मनचले हैं । कृपा है सब पे रब की , पर्वत से सब खड़े हैं । ना दर्द कोई दिल में , छा जाऐं वो महफिल में । वो सबके काम आयें , जो भी हो मुश्किल में । नहीं कोई है घमंडी , ना ही […]