राहत इंदौरी को हिन्दुस्तान का जवाब

राहत इंदौरी ने लिखा था “सभी का खून है शामिल यहाँ की मिट्टी मेंकिसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है “~ अब इंदौरी और उसके चमचों को ये रहा हमारा भी जवाब: “ख़फ़ा होते हैं हो जाने दो, घर के मेहमान थोड़ी हैंजहाँ भर से लताड़े जा चुके हैं , इनका मान थोड़ी है ये […]

हरि ओम शरण जी का भजन

दाता एक राम भिकारी सारी दुनिया दाता एक राम भिकारी सारी दुनिया राम एक देवता पुजारी सारी दुनिया पुजारी सारी दुनिया दाता एक राम….. द्वार पे उसके जाके कोई भी पुकारता परम कृपा दे अपनी भाव से उभरता ऐसे दीना नाथ पे बलिहारी सारी दुनिया दाता एक राम भिकारी सारी दुनिया दाता एक राम….. दो […]

देवों की महिमा

देवों की महिमा जान सकते नहीं, प्रभु की लीला पहचान सकते नहीं, दुर्लभ कार्य भी यूंही नहीं कर जाते, खुद को भी यूंही संसार में फंसा नहीं पाते, खोजते जिसे दर बदर वह यहीं खुद में छिपा, खंगाल लो जब खुद को प्रभु खुद को भी नहीं सके छिपा।

मेरे भोले भण्डारी

मेरे भोले भण्डारी, तुम हो कैलाश के वासी, अखंड मंगल हो आता जब दरश तेरा दिख जाता, गंगा पवन धारी चन्द्रमा के भाग्य को तारी, मूषक वाहन दे कर मोर सवारी दे कर, पुत्रों के कार्य सवांरे उनके स्थान हैं धारे, मैया शक्ति ने ध्याया तप कर तुमको है पाया, महाकाल तुम विकराल हाथों त्रिशूल […]

मुंशी प्रेमचंद जी की एक सुंदर कविता

🐋 *मुंशी प्रेमचंद जी की एक सुंदर कविता, जिसके एक-एक शब्द को बार-बार पढ़ने को मन करता है-_* _ख्वाहिश नहीं मुझे_ _मशहूर होने की,”_ _आप मुझे पहचानते हो_ _बस इतना ही काफी है।_ _अच्छे ने अच्छा और_ _बुरे ने बुरा जाना मुझे,_ _जिसकी जितनी जरूरत थी_ _उसने उतना ही पहचाना मुझे!_ _जिन्दगी का फलसफा भी_ […]

सो गया

In memory of my beloved brother who left us on 18th December सो गया दरखत अपनी भुजाओं में , खेलकर बड़ा हुआ इन्हीं हवाओं में , तौल न सके तराजू से वाट उसे , उड़ गया कैसे कब इन्हीं हवाओं में। कितने लम्बे हाथ थे जनाव उसके , कैसे द्रुतगामी घोड़े थे मन के उसके, […]