नहीं होते

जाने क्यूँ, अब शर्म से, चेहरे गुलाब नहीं होते। जाने क्यूँ, अब मस्त मौला मिजाज नहीं होते। पहले बता दिया करते थे, दिल की बातें। जाने क्यूँ, अब चेहरे, खुली किताब नहीं […]

अंतरमन

घनघोर अंधेरा छाये जब कोई राह नज़र ना आये जब कोई तुमको फिर बहकाये जब इस बात पे थोड़ी देर तलक तुम आँखें अपनी बंद करना और अंतरमन की सुन लेना मुमकिन […]

तुझे पाना

मेरी आशिकी तेरे लिए तेरी रैहमत मेरे लिए, तुझे पाना और अपना बनाना, जग छूट जाए चाहे दुनिया रूठ जाए, तुझे पाना और अपना बनाना, सन्यास लूंँ चाहे जग छोडूँ चाहे, तुझे […]

करवटें

कुछ वक्त की करवटें सी बदलती देखीं कुछ अपनी तमन्नाऐं सी बदलती देखीं, हर वक्त सिलसिले वार चाल थी उसकी ‘मै’ के प्रहार से हालत नासाज थी उसकी, जमाने मे जज्बातों की […]

भाई लोग

भाई लोगों.. एक कविता लिखी है.. बताना कैसी है… एक बात सोच रहा था.. विचार कर सिर खुजा रहा था, कितने घनिष्ठ हैं रिश्ते अपने पूरे नहीं पड़ते जज्बात अपने, इन चुटकुलों […]

एक मुलाकात

एक मुलाकात हर रोज़ अपने आप से होती है कुछ पुरानी कुछ नयी बात सी होती है, हवाओं के रुख जो बदल जाया करते हैं यूँही, आँखें भरी हुईं सी और हर […]

परिभाषा

बेचैनी व चैन की परिभाषा भूल बैठे सभी दृश्य एक दूसरे में घुले-मिले बैठे होली के रंगों में रंगे थी कमीज जैसे हर रंग यहीं शुरु यहीं खत्म हो जैसे रंगो की […]