जीता रहा इंसान

Not my poetry.. Anonymous writer उल्हजहनोँ मेँ उल्हज कर जीता रहा इंसान जीने का सलीखा अंततक कभी सीखा नहीं उम्रभर अंधेरों से ही सदाँ लड़ता रहा इंसान जलता चिराग हाथ मेँ लेकर […]

जारी है

कितने इंतहानो से गुज़रे, तक़लीफ फिर भी ज़ारी है हर इंतहाँ से सफल गुज़रे, तक़लीफ फिर भी जारी है। ———– क्या गुनाह किया था तुमने, कि हश्र अभी जारी है रहनुमाई में […]

अथ श्री महाकाल स्तोत्रं

ॐ महाकाल महाकाय महाकाल जगत्पते । महाकाल महायोगिन महाकाल नमोस्तुते ।। महाकाल महादेव महाकाल महा प्रभो । महाकाल महारुद्र महाकाल नमोस्तुते ।। महाकाल महाज्ञान महाकाल तमोपहन । महाकाल महाकाल महाकाल नमोस्तुते ।। […]

बहक कर निकले

बेपरवाह मौसम करता है रुसवा जमाने को कर निकले शमा रौशन जैसे पूरे मैखाने को, अलग अलग इंतज़ाम लिए हर मय जैसे तासीर अपनी बैठे हैं सब मौसमों में खोए हुए लिए […]

जब चौथे आयाम से देखा

ज़िंदा थे पर तस्वीरों में पहुँचते देखे कुछ तस्वीरें भी ज़िंदा होती देखीं, कुछ को चलन निभाते देखा कुछ को चलन सिखाते देखा, उलझे हुए को खुश देखा सुखी को उलझते देखा, […]

कई लम्हे इस तरह

समय लाया है कई लम्हे इस तरह सांसे कभी जाती कभी आतीं जिस तरह, ये कशमकश जिदंगी से पहचान बनाती ऐसे हो रहा प्रारम्भ मनचाही उडान का इस तरह, ले हाथों में […]

मंगल भवन अमंगलहारी

बुद्धिमान बने मनुष्य कुछ सत्य-अर्धसत्य की पहचान कुछ अपनी बातों से कर प्रभावित कंधों पर सवार दूसरों के बना रहे पहचान कुछ। गड्ढे खोद दूसरों के लिए सिर ताने हुए हैं गणना […]