चिरान्नद

नारायण का नाम लिजीए सार्थक अपने काम किजीए, रख विश्वास आगे बढिए एक नया संसार गढिए, होए है जब तिहारे मन में उजियारा तब जगत लगे भया सब हमारा, मुस्कान मन्द मन्द […]

माँ

माँ कबीर की साखी जैसी तुलसी की चौपाई-सी माँ मीरा की पदावली-सी माँ है ललित रुबाई-सी। माँ वेदों की मूल चेतना माँ गीता की वाणी-सी माँ त्रिपिटिक के सिद्ध सूक्त-सी लोकोक्तर कल्याणी-सी। […]

शहर

*तेरी बुराइयों* को हर *अख़बार* कहता है, और तू मेरे *गांव* को *गँवार* कहता है // *ऐ शहर* मुझे तेरी *औक़ात* पता है // तू *चुल्लू भर पानी* को भी *वाटर पार्क* […]

दोस्त

देखी जो नब्ज मेरी, हँस कर बोला वो हकीम : “जा जमा ले महफिल पुराने दोस्तों के साथ, तेरे हर मर्ज की दवा वही है।” दोस्तो से रिश्ता रखा करो जनाब… ये […]

नहीं होते

जाने क्यूँ, अब शर्म से, चेहरे गुलाब नहीं होते। जाने क्यूँ, अब मस्त मौला मिजाज नहीं होते। पहले बता दिया करते थे, दिल की बातें। जाने क्यूँ, अब चेहरे, खुली किताब नहीं […]

अंतरमन

घनघोर अंधेरा छाये जब कोई राह नज़र ना आये जब कोई तुमको फिर बहकाये जब इस बात पे थोड़ी देर तलक तुम आँखें अपनी बंद करना और अंतरमन की सुन लेना मुमकिन […]

तुझे पाना

मेरी आशिकी तेरे लिए तेरी रैहमत मेरे लिए, तुझे पाना और अपना बनाना, जग छूट जाए चाहे दुनिया रूठ जाए, तुझे पाना और अपना बनाना, सन्यास लूंँ चाहे जग छोडूँ चाहे, तुझे […]