हरिवंश दा की प्रसिद्ध पंक्तियों की प्रेरणा

हरिवंश दा की प्रसिद्ध पंक्तियों की प्रेरणा से आज के परिपेक्ष्य में आप सभी से निवेदन,,,, शत्रु ये अदृश्य हैविनाश इसका लक्ष्य हैकर न भूल, तू जरा भी ना फिसलमत निकल, मत निकल, मत निकल हिला रखा है विश्व कोरुला रखा है विश्व कोफूंक कर बढ़ा कदम, जरा संभलमत निकल, मत निकल, मत निकल उठा […]

नोक झोंक की वर्णमाला

मुन्ने के नंबर कम आए,पति श्रीमती पर झल्लाए,दिनभर मोबाइल लेकर तुम,टें टें टें बतियाती होआता तो है खाक तुम्हें,क्या मुन्ने को सिखलाती हो ? यह सुनकर पत्नी जी ने,सारा घर सर पर उठा लिया !पति देव को लगा कि क्यों,सोती सिंहनी को जगा दिया ! मेरे कामों का लेखा जोखा,तुमको बतलाती हूं !आओ तुमको अच्छे […]

राधे राधे

खुद को साधे नहीं , बस यूंही चलत संसार जगतपिता को ध्याय रहा, बिना भाव संसार। कैसे धरूं धीरज, निज मन को नहि आवत सुझाय फंसा आडम्बर में मांगत माया, बस यूंही चलत संसार।। ध्यान धरयो कान्हा के जब, नहीं आवत देखि हाल यूंही लीला धरे पर, कबहुं ना पूछत हाल। राधे राधे जब जपा, […]

आप को प्रणाम

हरामखोरों की फौज खड़ी है,सत्ता की अगवानी में।दिल्ली वाले बिक गये सारे,मुफ्त के बिजली पानी में।।शाहीनबाग ही नहीं जीता,अफजल बानी भी जीत गये।जेएनयू भी जीत गया और,रोहिंग्या भी जीत गये।वो एक हो गये अपनी ,कौम की निगहबानी में।और तुमने जमीर बेच दियाबस मुफ्त के बिजली पानी में।हिन्दुस्तान हार गया औरपाकिस्तानी जीत गयेदिल्ली वाले रीझ गये,विकास […]

मुन्सी प्रेमचंद जी की एक सुंदर कविता

ख्वाहिश नहीं मुझे_मशहूर होने की,_आप मुझे पहचानते हो_ _बस इतना ही काफी है._ अच्छे ने अच्छा औरबुरे ने बुरा जाना मुझे,_क्यों की जिसकी जितनी जरूरत थी_ _उसने उतना ही पहचाना मुझे._ जिन्दगी का फलसफा भीकितना अजीब है,_शामें कटती नहीं और_ _साल गुजरते चले जा रहें है._ एक अजीब सीदौड है ये जिन्दगी,_जीत जाओ तो कई_ […]

राहत इंदौरी को हिन्दुस्तान का जवाब

राहत इंदौरी ने लिखा था “सभी का खून है शामिल यहाँ की मिट्टी मेंकिसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है “~ अब इंदौरी और उसके चमचों को ये रहा हमारा भी जवाब: “ख़फ़ा होते हैं हो जाने दो, घर के मेहमान थोड़ी हैंजहाँ भर से लताड़े जा चुके हैं , इनका मान थोड़ी है ये […]