पिता का श्रण

हम हैं जहाँ में, किया परिश्रम आपने माँ की इच्छाओं का सत्कार शीलता का परिचय दिया आपने। थे कुछ शैतान हम दिया स्वत्व तब आपने हम शिक्षित हैं आज ऐसा अयोजन किया […]

फटेहाल है मित्र

जूते घिसे छेद वाली शर्ट पहने फटेहाल मेरा मित्र बस केशव के गुण गाए, गृह अशांत पर पत्नी शांत उसकी इसी आनन्द मे मुस्कुराहट मुख पर आए, रास्ता कहीं दिखता भी है […]

चिरान्नद

नारायण का नाम लिजीए सार्थक अपने काम किजीए, रख विश्वास आगे बढिए एक नया संसार गढिए, होए है जब तिहारे मन में उजियारा तब जगत लगे भया सब हमारा, मुस्कान मन्द मन्द […]

माँ

माँ कबीर की साखी जैसी तुलसी की चौपाई-सी माँ मीरा की पदावली-सी माँ है ललित रुबाई-सी। माँ वेदों की मूल चेतना माँ गीता की वाणी-सी माँ त्रिपिटिक के सिद्ध सूक्त-सी लोकोक्तर कल्याणी-सी। […]

शहर

*तेरी बुराइयों* को हर *अख़बार* कहता है, और तू मेरे *गांव* को *गँवार* कहता है // *ऐ शहर* मुझे तेरी *औक़ात* पता है // तू *चुल्लू भर पानी* को भी *वाटर पार्क* […]

दोस्त

देखी जो नब्ज मेरी, हँस कर बोला वो हकीम : “जा जमा ले महफिल पुराने दोस्तों के साथ, तेरे हर मर्ज की दवा वही है।” दोस्तो से रिश्ता रखा करो जनाब… ये […]

नहीं होते

जाने क्यूँ, अब शर्म से, चेहरे गुलाब नहीं होते। जाने क्यूँ, अब मस्त मौला मिजाज नहीं होते। पहले बता दिया करते थे, दिल की बातें। जाने क्यूँ, अब चेहरे, खुली किताब नहीं […]