Month: December 2015

राजनीति का रंग और ढंग बदल गए

राजनीति का रंग और ढंग बदल गए, बदल चुके इंसान, दफ़न हो चुकी राजनीति  बचा ना कोई निशान। कुछ हैं इतिहास में जिन्होंने  लिखी नीतियाँ , किया करते थे राज  नाम ले कर जिनका  […]

वक़्त से रुसवा हो ऐसे चले थे कि बेपरवाह हो गए

वक़्त से रुसवा हो ऐसे चले थे कि बेपरवाह हो गए , उसने जाने अनजाने याद रखा और ख़ैरखवाह हो गए। बेरुख़ी समझी हमने परवरदेगार की सन्यासी हो गए, खरखवाहों में रह कर […]

चलूँगा और बनाऊँगा एक नया संसार

जंगल में बैठ ठंडी साँस  ले रहा हूँ, इस जंगल में  फिर जीवन का आनंद ले रहा हूँ, यहाँ फिर  एक इत्तफ़ाक़ हो रहा है, जानवरों को देख कुछ सीखें  ऐसा विचार हो रहा है। […]

इन ख़यालों से

इन ख़यालों से जीवन का सार हैं, इन खालों से  कर्म क्षेत्र निर्धारित हैं, इन ख़यालों से  नीतियां निर्मित हैं, इन ख़यालों से  घर की नींव आधारित है, इन ख़यालों से  अपने […]

आज भविष्यवक्ता का कथन पढ़ा

आज भविष्यवक्ता का कथन पढ़ा शरीर में झुरझूरी दौड़ गयी, लगा वही समय और बड़े आग़ाज़ के साथ  लौट आया है, वही सब फिर  होगा, वही पंक्तियाँ  पढ़ी जाएँगी, वही ग़म  दिखायी […]

तेरा नींद से भरी आँखों से मेरी तरफ़ देखना

तेरा नींद से भारी आँखों से मेरी तरफ़ देखना, धीरे धीरे से  खिसक कर  मेरी गोद में लेटना, इन पलों को  संजोये जीता हूँ  मैं मेरी परी। सुबह उठ कर  वो चहचहा […]

ऐसे विचारों ने मुझे झकझोरा

एक लड़की को देखा  देखता ही रहा, कुछ है अलग, क्या है अलग, क्यों है अलग, ऐसे विचारों ने  मुझे झकझोरा । साफ़ रंग  सिर झुका हुआ  सादे वस्त्र हाथ में लैप्टॉप […]