राजनीति का रंग और ढंग बदल गए

राजनीति का रंगऔर ढंग बदल गए,बदल चुके इंसान,दफ़न हो चुकीराजनीति बचा ना कोई निशान।कुछ हैं इतिहास मेंजिन्होंने लिखी नीतियाँ ,किया करते थे राज नाम ले कर जिनका बनती थीं नीतियाँ।अब तो राजनीति बन गयी है रंग मंचउन लोगों काजो बटोरें दोनो हाथ,खेलें खेल बैठ क़ब्र पर,नाच नचाते बन कर जगन्नाथ।प्रजा को तो दफ़ना चुके हैं अपने ही हाथ,राजा बन बैठे मुर्दों की बारात,बने हुए हैं भक्षकहाथों में लिए कटार,क़त्ल … Continue reading राजनीति का रंग और ढंग बदल गए

वक़्त से रुसवा हो ऐसे चले थे कि बेपरवाह हो गए

वक़्त से रुसवा हो ऐसे चले थे कि बेपरवाह हो गए ,उसने जाने अनजाने याद रखा और ख़ैरखवाह हो गए।बेरुख़ी समझी हमने परवरदेगार की सन्यासी हो गए,खरखवाहों में रह कर भी बेमुराव्वत लापरवाह हो गए।कुछ जुनून तो है नौजवान-ए-हिंद में कर गुज़रने को,ज़लज़ले से निकली लहरों में खड़े बंदरगाह हो गए ।फ़लसफ़े ज़िंदगी ने लिखे बेइंतहा … Continue reading वक़्त से रुसवा हो ऐसे चले थे कि बेपरवाह हो गए

चलूँगा और बनाऊँगा एक नया संसार

जंगल में बैठ ठंडी साँस ले रहा हूँ,इस जंगल में फिर जीवन का आनंदले रहा हूँ,यहाँ फिर एक इत्तफ़ाक़ हो रहा है,जानवरों को देख कुछ सीखें ऐसा विचार हो रहा है।सादा जीवन संयम प्यार और सद्भाव,जीवन व्यापन नित्य बन प्रकृति का हिस्सा,संजोये रखूँ इस धरोहर कोयही उदेस्य हो रहा है।जनता हूँ मैं सर्वश्रेष्ठ हूँ,बनाया उसने वो बुद्धिमान हूँ,पर दुष्कर्म में लगा हुआकर रहा विनाश हूँ,कहीं फोड़ता बम कहीं काटता पेड़ हूँ,मजबूरी … Continue reading चलूँगा और बनाऊँगा एक नया संसार

इन ख़यालों से

इन ख़यालों सेजीवन का सार हैं,इन खालों से कर्म क्षेत्र निर्धारित हैं,इन ख़यालों से नीतियां निर्मित हैं,इन ख़यालों से घर की नींव आधारित है,इन ख़यालों से अपने सपने संजोये हूँ,इन ख़यालों से भूतकाल का भ्रमण करता हूँ,इन ख़यालों को नियंत्रित करने को तत्पर हुआ हूँ,इन ख़यालों को ना करने दूँगा ख़ुद पर विजय प्राप्त,यही सोच इंसान प्रतिदिन गतिशील होता है, यही सोच इंसान प्रतिदिन कर्म के फल … Continue reading इन ख़यालों से

आज भविष्यवक्ता का कथन पढ़ा

आज भविष्यवक्ता का कथन पढ़ाशरीर में झुरझूरी दौड़ गयी,लगा वही समयऔर बड़े आग़ाज़ के साथ लौट आया है,वही सब फिर होगा,वही पंक्तियाँ पढ़ी जाएँगी,वही ग़म दिखायी देंगे,हम फिर उसी चौराहे पर खड़े होंगे,पर ये निश्चित नहींकी अब की बार कौन साथ होगाऔर कौन छोड़गा साथ,कौन रोएगा की क्यों ऐसा होता है तुम्हारे साथ ।हम फिर एक कोने में बैठे रोएँगे ,प्रभु से बात कर फिर पूछेंगे ऐसा … Continue reading आज भविष्यवक्ता का कथन पढ़ा

तेरा नींद से भरी आँखों से मेरी तरफ़ देखना

तेरा नींदसे भारी आँखों सेमेरी तरफ़ देखना,धीरे धीरे से खिसक कर मेरी गोद में लेटना,इन पलों को संजोये जीता हूँ मैं मेरी परी।सुबह उठ कर वो चहचहा कर बातें करना ,स्कूल के लिए तेय्यार हो गाड़ी में बैठना,गाने सुनते हुए गुनगुना कर खिड़की से झाँकना ,बस इन पलों को संजोये जीता हूँ मैं मेरी परी।हर तकलीफ़ फीकी है,जब मिलता है तेरी नन्ही सी बाहोंमें सिमटना,हर ग़ुस्सा क़ाबू में होता है तबपड़ता … Continue reading तेरा नींद से भरी आँखों से मेरी तरफ़ देखना

ऐसे विचारों ने मुझे झकझोरा

एक लड़की को देखा देखता ही रहा,कुछ है अलग,क्या है अलग,क्यों है अलग,ऐसे विचारों ने मुझे झकझोरा ।साफ़ रंग सिर झुका हुआ सादे वस्त्रहाथ में लैप्टॉप बैग,पर ये क्या चेहरा कालाक्यों मगर,ऐसे विचारों ने मुझे झकझोरा।क्या है ऐसा,क्यों है ऐसा क्या है येजन्म से ऐसे,या किसी नेकिया ऐसा,ऐसा विचारों  ने मुझे झकझोरा।रोज़ तो पढ़ते अख़बारों में,कभी किसी को लूटा जाता, कभी किसी को छीना जाता,कभी तेज़ाब फेंका जाता,क्यों है … Continue reading ऐसे विचारों ने मुझे झकझोरा

कल हमारी महफ़िल में कुछ दोस्त यार थे

कल हमारी महफ़िल में कुछ दोस्त यार थे |जामों कि खनक थी कुछ यारों के दरमियाँ |सुनने और सुनाने में मगर शोर बहुत था|खाली पड़े हैंजाम ज़राइनकी भी तो सुन लें|यादें पुरानी ताज़ीकर  कुछ लुफ्त ले लिया|सन्नाटे की आवाज़ है, इनकी भी तो सुन लें|किससे कहें ये यार हम किस को सुनाएँ|दिल से जो निकली … Continue reading कल हमारी महफ़िल में कुछ दोस्त यार थे

कब सत्य प्रत्यक्ष देखूँगा मैं

कहता गुरुबहुत कर्मशील होना है तुम्हें,कहता गुरु बहुत धेर्यधरना है तुम्हें,तब चलोगे तुम तब बढ़ोगे तुम ,तब हो अग्रसर नेतृत्व सबका करोगे तुम,यही सुन कर जीता हूँ मैं।मैं बैठा यही सोचता हूँ ,क्यों और कहाँ जाना है मुझे,गुरु के कचोटने से क्यों बेचैन रहता हूँ मैं।इच्छा तो उस ज्ञान की है ,इच्छा तो उस आयाम की है ,जिसे पाने परप्रत्यक्ष हूँ मैं,जिसे पाने हेतु रुकने को नियमित हूँ मैं।क्यों इस कविता के … Continue reading कब सत्य प्रत्यक्ष देखूँगा मैं

बेख़बर इंसान से ये पूछो की कैसे

बेख़बर इंसान से ये पूछो की कैसेकरे इतना अभिमान चढ़ेगा सूली पर कैसे ।उसने इसे बनाया क्या सोच करबनेगा मेरा प्रतिबिंब चढ़ेगा सूली पर कैसे।दशों दिशाओं का ज्ञानी हो कर भी रावणलाया सीता को हर , चढ़ेगा सूली पर कैसे ।था बस सूली पर चढ़ना ईसा के ही बस मेंतृष्णाओं को अपनाए चढ़ेगा सूली पर … Continue reading बेख़बर इंसान से ये पूछो की कैसे