Shayari

बेख़बर इंसान से ये पूछो की कैसे

बेख़बर इंसान से
ये पूछो की कैसे

करे इतना अभिमान
चढ़ेगा सूली पर कैसे ।
उसने इसे बनाया
क्या सोच कर
बनेगा मेरा प्रतिबिंब
चढ़ेगा सूली पर कैसे।
दशों दिशाओं का ज्ञानी
हो कर भी रावण
लाया सीता को हर ,
चढ़ेगा सूली पर कैसे ।
था बस सूली पर चढ़ना
ईसा के ही बस में
तृष्णाओं को अपनाए
चढ़ेगा सूली पर कैसे ।
कोई साथ ना हो
जब तलक तेरे, तब तलक
ग़ज़ल में ना हो प्यार,
तू चढ़ेगा सूली पर कैसे ।
सन्यासी की नौ सीख़ियों
जैसी ग़ज़ल को
तू पढ़ के मुस्कुराए,
चढ़ेगा सूली पर कैसे।
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