बेख़बर इंसान से ये पूछो की कैसे

बेख़बर इंसान से ये पूछो की कैसे
करे इतना अभिमान चढ़ेगा सूली पर कैसे ।
उसने इसे बनाया क्या सोच कर
बनेगा मेरा प्रतिबिंब चढ़ेगा सूली पर कैसे।
दशों दिशाओं का ज्ञानी हो कर भी रावण
लाया सीता को हर , चढ़ेगा सूली पर कैसे ।
था बस सूली पर चढ़ना ईसा के ही बस में
तृष्णाओं को अपनाए चढ़ेगा सूली पर कैसे ।
कोई साथ ना हो जब तलक तेरे, तब तलक 
ग़ज़ल में ना हो प्यार, तू चढ़ेगा सूली पर कैसे ।
सन्यासी की नौ सीख़ियों जैसी ग़ज़ल को
तू पढ़ के मुस्कुराए, चढ़ेगा सूली पर कैसे।

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s