Month: February 2016

तूफ़ान आया है

तेज़ हवाएँ  चल रहीं कमज़ोर पत्तियाँ शाख़ से टूट रहीं, सब अस्त्वयस्त हो रहा हर तरफ़ तूफ़ान पर फैला रहा मंज़र बर्बादी का ला रहा, पक्षियों को उड़ना कहाँ पता नहीं पशुओं […]

तुम भी ढूँढो

भटकते हैं लोग करने सपने को साकार, कोई बेचता ख़ुद को कोई निकल पड़ता बेचने खुदा का आकार, अज्ञानतावश भूल मर्यादा  और जड़ों को अपनी, बस चल पड़ते हैं  खोज में  पता नहीं किसकी […]