‘मौहब्बत"’ By N. S. Chauhan

राह पर आना था तुमको,पत्थर मैं चुन रहा था ।आवाज थी तुम्हारी,संगीत मैं सुन रहा था ।शब्द थे तुम्हारे,गीत मैं लिख रहा था।हुस्न था तुम्हारा,होश मैं खो रहा था  ।खुशबु ए बदन थी तुम्हारी,महक मैं  रहा था  ।लब चुप थे तुम्हारे,धड़कन मैं सुन रहा था।अदा थी तुम्हारी,फिदा मैं हो रहा था।मुस्करा रही थी तुम,फूल मैं … Continue reading ‘मौहब्बत"’ By N. S. Chauhan

Yogeshwar Dutt on JNU Row

JNU row: If Afzal Guru a martyr, who was Lance Naik Hanumanthappa? Asks Yogeshwar Dutt in heart-touching poemYogeshwar Dutt  in his words :-किन लोगों के लिए सेना के जवान जान की बाज़ी लगा रहे हैं और किन लोगों के गर्व के लिए खिलाड़ी दिन रात पसीना बहा रहे हैंग़ज़नी का है तुम मे खून भराजो … Continue reading Yogeshwar Dutt on JNU Row

तूफ़ान आया है

तेज़ हवाएँ  चल रहीं कमज़ोर पत्तियाँ शाख़ से टूट रहीं,सब अस्त्वयस्त हो रहा हर तरफ़ तूफ़ान पर फैला रहामंज़र बर्बादी का ला रहा,पक्षियों को उड़ना कहाँ पता नहींपशुओं को छुपना कहाँ पता नहीं,कुछ ऐसे भी हैं जीव यहाँ जिन्हें जाना कहाँ पता नहीं।प्रारभद से बँधे सब चल रहे तूफ़ान से लड़ते हुए बढ़ रहे,क़िस्मत क्या लायी है सामनेबस तूफ़ान … Continue reading तूफ़ान आया है

इम्तिहान है ये ज़िंदगी हर पल

इम्तिहान है ये ज़िंदगी हर पल, कभी पास कभी फ़ेल,हम भी यूँही चल रहे हैं हर क़दम, कभी पास कभी फ़ेल,खुदा मिले तो ये पूछूँगा में की क्या कोई है जो ले उसका भी इम्तिहान,या बस बंदो के लिए है ये दस्तूर कभी पास कभी फ़ेल।खेल रहे ग्रह , फँसे इंसान इस चक्कर में बेबस हैं,हम … Continue reading इम्तिहान है ये ज़िंदगी हर पल

तुम भी ढूँढो

भटकते हैं लोगकरने सपने को साकार,कोई बेचता ख़ुद कोकोई निकल पड़ता बेचनेखुदा का आकार,अज्ञानतावश भूल मर्यादा और जड़ों को अपनी,बस चल पड़ते हैं खोज में पता नहीं किसकीये इस प्रकार,कर्म क्षेत्र बना घर से दूरइंसान परिश्रम करें भरपूर,पा जाते सम्पत्तिउठते-बढ़ते महकते जैसे कपूर।व्याकुलता स्पष्ट हो जाती जब खो देते हैं होश,रोते बिलखते छुपा लेते हैं वो अपने अश्रु,पूर्ण मन और जतन से उठाए घर-परिवार का … Continue reading तुम भी ढूँढो

मैं समय हूँ

मैं समय हूँ देखा है मैने सब,इस ब्रह्माण्ड की उत्त्पती से लेकर हो रहे विनाश तक,माँ आदि देवी  ने दिया जन्म परमपिता को जिसने रचा ये संसार,सहज सरल स्वभाव का किया उसने संचार,मीठे फल सुंदर संसार में दिया जीवन अपार,फिर रचा इंसान प्रभु ने दी है जिसे बुद्धि समान,सोचा प्रभु ने सुंदर होगी रचना मेरी लेगा ये इसे सम्भाल,परंतु वो भूल गयेहै मूर्ख इंसान,अपने ही … Continue reading मैं समय हूँ