मैं समय हूँ

मैं समय हूँ देखा है मैने सब,इस ब्रह्माण्ड की उत्त्पती से लेकर हो रहे विनाश तक,माँ आदि देवी  ने दिया जन्म परमपिता को जिसने रचा ये संसार,सहज सरल स्वभाव का किया उसने संचार,मीठे फल सुंदर संसार में दिया जीवन अपार,फिर रचा इंसान प्रभु ने दी है जिसे बुद्धि समान,सोचा प्रभु ने सुंदर होगी रचना मेरी लेगा ये इसे सम्भाल,परंतु वो भूल गयेहै मूर्ख इंसान,अपने ही … Continue reading मैं समय हूँ