Yogeshwar Dutt on JNU Row

JNU row: If Afzal Guru a martyr, who was Lance Naik Hanumanthappa? Asks Yogeshwar Dutt in heart-touching poem

Yogeshwar Dutt  in his words :-

किन लोगों के लिए सेना के जवान जान की बाज़ी लगा रहे हैं और किन लोगों के गर्व के लिए खिलाड़ी दिन रात पसीना बहा रहे हैं

ग़ज़नी का है तुम मे खून भरा
जो अफ़ज़ल के गुण तुम गाते हो
जिस देश मैं तुमने ज्नम लिया
उसको दुश्मन बतलाते हो

भाषा की ये कैसी आज़ादी
जो तुम भारत मा  का अपमान करो
अभिव्यक्ति का ये कैसा रूप
जो तुम देश की इज़्ज़त नीलाम करो

अफ़ज़ल को अगर शहीद कहते हो
तो हनुमानथप्पा क्या कहलाएगा
कोई इनके रहनूमाओ का
मज़हब मुझको बतलाएगा

अपनी मा से जंग करके
ये कैसी सता तुम पाओगे
जिस देश के तुम गुण गाते हो
वहा बस काफ़िर कहलाओगे

 हम तो अफ़ज़ल मारेंगे
तुम फिर अफ़ज़ल पैदा कर लेना
तुम जैसे गददारो पे
भारी पड़ेगी भारत के सेना

तुम ललकारो और हम ना आए
इतने बुरे हालात नही
भारत को बर्बाद करो
इतनी तुम्हारी औकात नही

 कलम पकड़ने वालो हाथो को
बंदूक उठाना ना पड़ जाए
अफ़ज़ल के लिए लड़ने वाले
कही हमारे हाथो ना मर जाए

 भगत सिंग और आज़ाद की
इस देश मैं कोई कमी नही बस इंक़लाब होना चाहिए
इस देश को बर्बाद करने वाली हर आवाज़ दब्नि चाहिए

ये देश तुम्हारा है ये देश हमारा है
इसका हम सम्मान करे
जिस धरती पे जनम लिया
उसपे हम अभिमान करे

ये कविता हमारे देश भकत साथी खिलाड़ी योगेशवर दत के सौजन्या से
जिसे हम दिल से नमन करते है .

मातृभूमि की सेवा और सम्मान हम सबकी परम और प्रथम दायित्व है । जय हिन्द

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