Month: March 2016

मित्र तुम समय हो

इच्छाओं से उत्पन्न हो सृष्टी की रचना करते हो तुम, मेरे दृष्टिकोण की रचना कर सार्थक करते हो तुम, सृष्टी जैसे मै चाहता हूँ वैसे ही हो जाती अनुरूप मेरी इचछाओं के […]

आईना

अटल पथ पर चलते रहकर इच्छाओं को दृढ़ता प्रदान करो यही उल्लेख ध्यान मे धरकर अपने कर्म पर ध्यान धरो | चाहते हो जो हो जाता है ध्यान धर उसे दृढता प्रदान […]

कश्मकश में बितती ज़िंदगी

कश्मकश में बितती ज़िंदगी, नासमझ से खड़े हैं हम कुछ खट्टी कुछ मीठी यादों के सहारे खड़े हैं हम अपनी ज़िंदगी को ख़ुद उलझाने की आदत है यहाँ गीता के ज्ञान का […]