Poetry

आईना

अटल पथ पर

चलते रहकर

इच्छाओं को दृढ़ता प्रदान करो

यही उल्लेख

ध्यान मे धरकर

अपने कर्म पर ध्यान धरो |

चाहते हो जो

हो जाता है

ध्यान धर

उसे दृढता प्रदान करो

समझो इस रहस्य को

और अपनी जिन्दगी को

अंजुली मे भरो|

जो हो रहा तुम्हारे साथ

वह आईना है

तुमहारी इच्छाओं का

इस आईने को

स्पष्टता  से

सही विशवाश से

संचालित  करो|

परब्रह्म की अनुभूति का तुम

फिर आनन्द लेकर

अनुग्रह हो इस विशवाश का

मित्रों में  संचार करो|

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