साथ-साथ

**********साथ-साथ******************अनजान सा बैठा हुआ , बस आँखे नम ना थींरुआंसा सा चलता हुआ,  बस पैर थके ना थे,थका हुआ सा मंजिल को पाने की वो मेरी ललक कुछ अहसासों को संजोए हुए, बस उम्मीद ना थी।तुम्हे देख ढाढस बंधाता हुआ, पाँव रुकते ना थे,अमानव सा इकठ्ठा कर खुद को, मंजिल मरीचिका ना थीहाथ पकड़ मेरा … Continue reading साथ-साथ