Month: August 2016

कहानी

तुम फूल हो पिता के गुलशन की, तुम्हे माँग कर लाया था तुम धड़कन हो भाईयों की, तुम्हे गठबंधन कर पाया था। आईं तुम मेरी दुनिया में, मरुस्थल का मै निवासी था […]

पहलू में

वक्त गुजरता है, लम्हे चले जाते कशमकश के पहलू में शाम हो जाती है, मंजर चले जाते उदासी के पहलू में। बैठे ताक रहे थे खिड़की से बाहर अंधेरों को चांदनी नजर […]

कन्हैया

राधा जी के संग खड़े बन्सी बजाते हो भजता मै तुम्हे तो मुझे देख मुस्कुराते हो भक्तों के मित्र हो तुम कन्हैया सदा ही बुलाने पर दौड़ कर आते हो। मित्रों के […]

चतुर्भुज

हे राम ! तुम सुन्दर हो हे श्याम ! तुम सुन्दर हो, चतुर्भुज रुप मे खड़े तुम सुन्दर नारायण हो। खोजता हूँ सोचता हूँ देखता हूँ  ढूंढता हूँ ना मन्दिर ना घर […]