कन्हैया

राधा जी के संग खड़े बन्सी बजाते हो भजता मै तुम्हे तो मुझे देख मुस्कुराते होभक्तों के मित्र हो तुम कन्हैया सदा ही बुलाने पर दौड़ कर आते हो। मित्रों के लिए तुम पहाड़ उठाते होकभी उन्हे बरबरीक सी मुक्ती दे जाते होभक्तों के मित्र हो तुम कन्हैया उनके लिए खुद रणछोड़ कहलाते हो। बुलाने … Continue reading कन्हैया

चतुर्भुज

हे राम तुम सुन्दर होहे श्याम तुम सुन्दर होचतुर्भुज रुप मे खड़े तुम सुन्दर नारायण हो। ढूंढता हूँ खोजता हूँ सोचता हूँ देखता हूँ ना मन्दिर ना घरआँखें बन्द कर पा लेता हूँ। अद्भुत तुम प्रत्यक्ष होकमल लिए कमलनयन होछवी अनूठी देख हर्षित हूँ गदा चक्र लिए सर्वशक्तिमान हो। फंसा मै माया मे खड़ा हुआॐ … Continue reading चतुर्भुज