कहानी

तुम फूल हो पिता के गुलशन की,  तुम्हे माँग कर लाया था तुम धड़कन हो भाईयों की, तुम्हे गठबंधन कर पाया था। आईं तुम मेरी दुनिया में, मरुस्थल का मै निवासी था घबराईं तुम देख मरुस्थल , मै भी लड़खड़ाया था। लड़े हम खुद से, कभी अपनो से किया घमासान फिर आई एक नन्ही परी, … Continue reading कहानी