बेमौसम बरसात

गर्मी का मौसम है  या बरसात में नाचेगा मोर,  सर्दी का मौसम है  या पतझड़ की होगी भोर,  रेत सा निकल समय  सांझ के पहर में अटक रहा,   स्वयं को देखता तो दुखद धारावाहिक सा जैसे चल रहा,  आँसुओं से भरा गागर हर पल में जीवन जैसे छलक रहा,  किस मुख इबादत करूं उसकी हर […]

खुशियाँ बाँटती जिंदगी 

जज्बातों में उलझी जिंदगी ख्वाबों में लिपटी जिंदगी कुछ हंसना कुछ हंसाना लम्हा लम्हा चलती जिंदगी।  यूं तो रोते भी हैं लोग मुस्कुराने के बहाने ढूंढते लोग कभी बहुत सताती भी है जिंदगी  फिर भी धैर्य धरते हैं लोग।  पंछियों की चहचहाहट में जिंदगी कुत्तों की प्यार से हिलती पूंछ में जिंदगी अगर ढूंढें सिर्फ […]

गिरने में देर नहीं लगती

खुद को संभालने में मेहनत नहीं लगती जहाँ खडे़ हो वहाँ से गिरने में देर  लगती किसी को धक्का देने से सोच लेना खुद फिसलने मे देर नहीं लगती।  खिल्ली उड़ाने से पहले सोच लेना किसी को खून के आँसू न रूला देना खुद की चिता देखने में देर नहीं लगती   कर्मो के फल यहीं […]

भोर होती दिख रही

भोर होती दिख रही पंछी घोंसलो से निकल रहे दूर क्षितिज पर सवार हो  सूर्य की पहली किरण  अंधेरा चीरती दिख रही।  मंदिरों की घंटियां  मस्जिदों की पहली अजान अहसास ये दिला रहीं जाती रात की बात छोड़  अब आगे बढ़ मैने गांडीव उठाया है।  हाथ जोड़ मै कर वनदन बनसीवाले ने भी सुदर्शन चक्र […]