Month: March 2017

बेमौसम बरसात

गर्मी का मौसम है  या बरसात में नाचेगा मोर,  सर्दी का मौसम है  या पतझड़ की होगी भोर,  रेत सा निकल समय  सांझ के पहर में अटक रहा,   स्वयं को देखता तो […]

खुशियाँ बाँटती जिंदगी 

जज्बातों में उलझी जिंदगी ख्वाबों में लिपटी जिंदगी कुछ हंसना कुछ हंसाना लम्हा लम्हा चलती जिंदगी।  यूं तो रोते भी हैं लोग मुस्कुराने के बहाने ढूंढते लोग कभी बहुत सताती भी है […]

गिरने में देर नहीं लगती

खुद को संभालने में मेहनत नहीं लगती जहाँ खडे़ हो वहाँ से गिरने में देर  लगती किसी को धक्का देने से सोच लेना खुद फिसलने मे देर नहीं लगती।  खिल्ली उड़ाने से […]

भोर होती दिख रही

भोर होती दिख रही पंछी घोंसलो से निकल रहे दूर क्षितिज पर सवार हो  सूर्य की पहली किरण  अंधेरा चीरती दिख रही।  मंदिरों की घंटियां  मस्जिदों की पहली अजान अहसास ये दिला […]