Month: October 2017

सवेरा

भई भोर सवेरा जाग उठा तू त्याग निद्रा को जाग उठा अब बारी योग करने की कुछ ध्यान कुछ कसरत करने की जब अस्तित्व निर्मल होता है तब सवेरा अच्छा होता है।  […]

अटल जी की दीवाली 

कविता अटलजी की है , अतिशय सुंदर ….. …….  जब मन में हो मौज बहारों की चमकाएँ चमक सितारों की, जब ख़ुशियों के शुभ घेरे हों तन्हाई  में  भी  मेले  हों, आनंद […]

तारनहार

नारायण के नाम ले, जुग जुग भयो संसार जप तप सब व्यर्थ गया, यूँही दूर भयो अंधकार। राम राम करत नाही, दुख के विवरण देत अन्भयास ओंकार की चाल पर, पंच तत्व […]