Month: January 2018

पिता – पुत्र

मेरे पिता का संदेश आओ किसी का यूँही इंतजार करते हैं चाय बनाकर फिर कोई बात करते हैं। उम्र साठ के पार हो गई हमारी बुढ़ापे का इस्तक़बाल करते है। कौन आएगा […]

खिचड़ी का आविष्कार

खिचड़ी का आविष्कार कई वर्षों पहले एक बार, दिन का नाम था रविवार। पति-पत्नी की एक जोड़ी थी, नोंकझोंक जिनमें थोड़ी थी। अधिक था उनमें प्यार, मीठी बातों का अम्बार। सुबह पतिदेव […]

हवाले थे

कुछ मामले कुछ मसाले थे कुछ हमारे कुछ उसके हवाले थे।  ..  हम चले थे अकेले ही अफसानो  की तलाश में खुशियाँ बाँटती जिंदगी ने किए नजराने हवाले थे।  …  वो बैठे […]

खाली हाथ

हाथ खाली हैं तेरे शहर से जाते जाते  जान होती तो मेरी जान लुटाते जाते  …  अब तो हर हाथ का पत्थर हमें पहचानता है  उम्र गुज़री है तेरे शहर में आते-जाते  […]

इंतेखाब

स्वप्न झरे फूल से, मीत चुभे शूल से, लुट गए सिंगार सभी बाग के बबूल से, और हम खड़े-खड़े बहार देखते रहे। कारवाँ गुज़र गया, गुबार देखते रहे! नींद भी खुली न […]

पांच कर्मो में फंसा

राम नाम की धुन से हो गयो उद्धार चरण वन्दना कर तर गयो, दूर भयो अन्धकार। काम मलत्याग गमन वाच एवम् व्यापार  पांच कर्मो में फंसा,  मै भटक रहा निराधार।  निराकार का […]