पिता – पुत्र

मेरे पिता का संदेश आओ किसी का यूँही इंतजार करते हैं चाय बनाकर फिर कोई बात करते हैं। उम्र साठ के पार हो गई हमारी बुढ़ापे का इस्तक़बाल करते है। कौन आएगा अब हमको देखने यहां एक दूसरे की देखभाल करते है। बच्चे हमारी पहुंच से अब दूर हो गए आओ फिर से उन्ही को […]

खिचड़ी का आविष्कार

खिचड़ी का आविष्कार कई वर्षों पहले एक बार, दिन का नाम था रविवार। पति-पत्नी की एक जोड़ी थी, नोंकझोंक जिनमें थोड़ी थी। अधिक था उनमें प्यार, मीठी बातों का अम्बार। सुबह पतिदेव ने ली अंगड़ाई, पत्नी ने बढ़िया चाय पिलाई। फिर नहाने को पानी किया गर्म, निभाया अच्छी पत्नी का धर्म। पति जब नहाकर निकल […]

हवाले थे

कुछ मामले कुछ मसाले थे कुछ हमारे कुछ उसके हवाले थे।  ..  हम चले थे अकेले ही अफसानो  की तलाश में खुशियाँ बाँटती जिंदगी ने किए नजराने हवाले थे।  …  वो बैठे थे इंतजार में,  लिए हाथ में प्याला और कुछ आँसू मुक्कमल सी थी मुलाकात, जो मिले हम गले सब हमारे हवाले थे।  …  […]

खाली हाथ

हाथ खाली हैं तेरे शहर से जाते जाते  जान होती तो मेरी जान लुटाते जाते  …  अब तो हर हाथ का पत्थर हमें पहचानता है  उम्र गुज़री है तेरे शहर में आते-जाते  …  रेंगने की भी इज़ाज़त नहीं हमको वरना  हम जिधर जाते नयें फूल खिलाते जाते  …  मुझको रोने का सलीक़ा भी नहीं हैं […]

इंतेखाब

स्वप्न झरे फूल से, मीत चुभे शूल से, लुट गए सिंगार सभी बाग के बबूल से, और हम खड़े-खड़े बहार देखते रहे। कारवाँ गुज़र गया, गुबार देखते रहे! नींद भी खुली न थी कि हाय धूप ढल गई, पाँव जब तलक उठें कि ज़िन्दगी फिसल गई, पात-पात झर गए कि शाख़-शाख़ जल गई, चाह तो […]

पांच कर्मो में फंसा

राम नाम की धुन से हो गयो उद्धार चरण वन्दना कर तर गयो, दूर भयो अन्धकार। काम मलत्याग गमन वाच एवम् व्यापार  पांच कर्मो में फंसा,  मै भटक रहा निराधार।  निराकार का भजन कर,  ज्ञानेद्रिंयाँ हुई हैं शांत परमानन्द की ओर अग्रसर हो रहा मै प्रशांत।  चित्त चिन्तन चिता की माया रहा मै छोड़  हुआ […]