Poetry

हम वो हैं ए दोस्त

मंज़िलों की तलाश मे,
भटके हुए जाया करते हैं
हम वो हैं ए दोस्त,
जिनके रास्ते खुद तय हो जाया करते हैं।

कुछ जज्बातों में,

जिंदगी गुजार लिया करते हैं

हम वो हैं ए दोस्त

जज्बात खुद जिनका सहारा लिया करते हैं।

ख्वाबों की दुनिया,

हर तरफ वो बसा लिया करते हैं

हम वो हैं ए दोस्त

ख्वाब खुद हमे अपना हमदम बना लिया करते हैं।

कहने को बहुत है,

इजहारे इश्क क्या करें उस खुदा से

हम वो हैं ए दोस्त

जिन्हे खुदा खुद ही अपना बना लिया करते हैं।

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