Month: December 2018

ख्वाब 

अश्कों के बहने से जो सैलाब आया था उनमें हमने उस खुदा को पाया था। ____ रहनुमा बन्ने वाले बहुत मिले हमे गुमराह करना उनकी फितरत पाया था। ___ जूझते सब्र रखे […]

तुम्हारी ज़रा-नवाज़ी के क़ायल हुए हम ऐसे

तुम्हारी ज़रा-नवाज़ी के क़ायल हुए ऐसे जैसे बर्फ़ किसी मय में मिल पिघले । आए थे तेरे कूचे पर बेख़बर यूँ तो जैसे खुदा की तलाश में जोगी चल निकले । थाम […]

कहाँ है वो जगह जहाँ सुकून-ए-जहाँ मिलते हैं

कहाँ है वो जगह जहाँ सुकून-ए-जहाँ मिलते हैं दिखाते सभी वो मंज़र, जहाँ सभी मसरूफ मिलते है । हम भी निकले हैं उस गुरु की खोज में कहते हैं शरण में उसकी, […]

सहिष्णुता

जीवन के सात रंग यही कहे इंसान कभी ख़ुशी कभी ग़म दगा और इल्ज़ाम यही रास्ते पर चल कर ऊँचा रखे स्थान कहाँ गयी सहिष्णुता क्या कर रहा इंसान । अपनो से […]

पूर्णविराम

जीवन चक्र में फँस उद्वेग में चलता रहा, अर्धसत्य के सत्यापन को पूर्णविराम समझता रहा, इंसान की यही कहानी जीवन चक्र में फँस उद्वेग में चलता रहा। जीवन पथ के उतार चढ़ाव […]

अज्ञानता और ढकोसला

बन्ध रहे पुराने बन्धन रीती रिवाजों के ये सभी मनोरंजन किया ये, न किया वो, तू कैसा है बदजात कर रहा ठीक है, पर बड़ो की नहीं मानी बात कैसे करें पार,  […]

माँ तू कहाँ खो गयी

माँ तू कहाँ खो गयी मेरी आँख कल नम हों गयी  जूझता समय से मै अधमरा हुआ हूँ  जिन्दगी समय के तूफान में खो गयी।  —- मै निकला उस डगर जो दिखाई […]