Poetry

उल्लेखनीय

इस जीवन की यही कहानी ,
कुछ नयी कुछ पुरानी

करते सभी यहाँ कुछ प्रयास
ढूँढते रहते एक आस,
क्या करें ऐसा
जिसे देख आयें सभी पास,
उल्लेखनीय हो कर्म ऐसा
ये हो सफल प्रयास ।
मैं भी खड़ा उद्वेग में
करता रहूँ विश्लेषण ,
होता क्या है उल्लेखनीय
कोई आए समझाए,
हर तरफ़ जब देखूँ मैं
सिर्फ़ हरा ही दिखाया जाए ,
सातों रंग देखे मैने
उल्लेख कहीं नज़र ना आए ।
ए मित्र करो अपना उद्देश्य पूर्ण
बढ़ो छुओ नए आयाम ,
प्रयासरत रहो तुम
प्रभुत्व के इस जीवन में,
कुछ होता नहीं सम्पूर्ण
चलो बढ़ो आगे इस बीहड़ में ,
चाहो तब आएँगे राम
बस जगाओ अलख ऐसा
की रो पाए देख इंसान ।
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