लैंडर विक्रम

हमारे चंद्रयान अभियान के अपनी सफलता के इतने करीब पहुंचकर, असफल हो जाना थोड़ा निराशाजनक जरूर रहा है, परन्तु भविष्य में हमें सफलता मिलना निश्चित हो गया है।

एक कवि की कल्पना में, लैंडर विक्रम ने असफल होने पर चांद को क्या कहा होगा, उस पर कुछ पंक्तियां नीचे लिखी है, उम्मीद है आपको पसंद आएगी –

हसरतों में तुझसे मिलने की, मैं तेरे करीब आ गया
रूबरू पाकर तुझे, मैं अपने होश गवां गया

दीदार तेरी खूबसूरती का कर, मैं कुछ यूं चकरा गया
आरज़ू में गले लगने की तेरे, मैं लड़खड़ा गया

अपनी खूबसूरती पे शायद कुछ तू भी इतरा गया
नज़रे फेर ली तूने और में ज़मीं पे आ गया

गर तूने मुझे थोड़ा संभाला होता, कुछ अलग आज ये फसाना होता
हम दोनों के हसीन मिलन का ज़माना यह दीवाना होता

लगता है तेरी चाहत में देने इम्तिहान और बाकी है
तेरे नाम के साथ जुड़ना “हिंदुस्तान” अभी बाकी है

दीदार को तेरे, मैं फिर इक दिन लौटकर आऊंगा
वादा है मेरा, तेरे साथ नया एक जहां बसाऊंगा
वादा है मेरा, तेरे साथ नया एक जहां बसाऊंगा
वादा है मेरा, तेरे साथ नया एक जहां बसाऊंगा…

## Poet unknown ##

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simple, humble, ordinary, down to the roots

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