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Polastya

बेमौसम बरसात

गर्मी का मौसम है  या बरसात में नाचेगा मोर,  सर्दी का मौसम है  या पतझड़ की होगी भोर,  रेत सा निकल समय  सांझ के पहर में अटक रहा,   स्वयं को देखता तो […]

खुशियाँ बाँटती जिंदगी 

जज्बातों में उलझी जिंदगी ख्वाबों में लिपटी जिंदगी कुछ हंसना कुछ हंसाना लम्हा लम्हा चलती जिंदगी।  यूं तो रोते भी हैं लोग मुस्कुराने के बहाने ढूंढते लोग कभी बहुत सताती भी है […]

गिरने में देर नहीं लगती

खुद को संभालने में मेहनत नहीं लगती जहाँ खडे़ हो वहाँ से गिरने में देर  लगती किसी को धक्का देने से सोच लेना खुद फिसलने मे देर नहीं लगती।  खिल्ली उड़ाने से […]

भोर होती दिख रही

भोर होती दिख रही पंछी घोंसलो से निकल रहे दूर क्षितिज पर सवार हो  सूर्य की पहली किरण  अंधेरा चीरती दिख रही।  मंदिरों की घंटियां  मस्जिदों की पहली अजान अहसास ये दिला […]

जिक्र उस ख्वाब का

जिक्र उस ख्वाब का करें कैसे,   जज्बात निकल आएंगे  पिघलती हुई शमा के मोम को छुआ तो  हाथ जल जाएंगे  तुम बेफिक्र रहो परवाना न बनो,  पंख जल जाऐंगे जिन्दा रहना […]

कई लम्हे इस तरह

समय लाया है कई लम्हे इस तरह सांसे कभी जाती  कभी आतीं  जिस तरह,  ये कशमकश जिदंगी से पहचान बनाती ऐसे  हो रहा प्रारम्भ  मनचाही उडान का इस तरह,  ले हाथों में […]

हरे हरे साँई हरे हरे

श्री हरे मुरारी कृष्ण हरे श्री राम सदाचारी हरे हरे राधे बलिहारी कृष्ण हरे सिया जी के प्रियवर हरे हरे।  तुम पर बलिहारी कृष्ण हरे देखो राम की सवारी हरे हरे राधा […]