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Polastya

मेरी माँ मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूँ

सुबह सवेरे उठते ही सारा जग राम राम करे में उठते ही   तुम्हें प्रणाम करता हूँ , ध्यान धर तुम्हारा  हर काम आरम्भ करता हूँ , सभी कुछ अच्छा हो जाता  जब […]

   ज्ञान चक्षु खुल रहे निरन्तर

ज्ञान चक्षु खुल रहे निरन्तर घ्यान धर अग्रसर मै निरनतर कष्ट हुए जो मिथ्या थे बाण सा खींच रहे तुम मुझे परस्पर। तुम धारक तुम ही आभार हो मेरा कभी गांडीव हूँ […]

राम राम 

।। राम राम।। ॐ नमः हनुमंतेय भय भंजनाय सुुखं कूरू फट स्वाहा।।      * “नाम” राम को कल्पतरू , कलि कल्याण  निवास ।        जो सुमिरत भये भाग्य ते […]

मुस्कुराते हुए 

मुस्कुराते हुए जिंदगी मेरी यूंही बीत गई तेरे साथ चलते हुए जिंदगी जीत गई कुछ बारिश सी हुई तो थी राह में तेरे साथ आते ही, जिंदगी गीत गाती चली गई। छाई […]

धैर्य धर 

धैर्य धर चल उज्ज्वल पथ पर धैर्य धर मुस्कुरा वर्तमान में रह कर वो खड़ा समीप सब देख रहा है धैर्य धर हो रही वर्षा हर पथ पर। हो खड़ा ले गांडीव […]

कहानी

तुम फूल हो पिता के गुलशन की, तुम्हे माँग कर लाया था तुम धड़कन हो भाईयों की, तुम्हे गठबंधन कर पाया था। आईं तुम मेरी दुनिया में, मरुस्थल का मै निवासी था […]

पहलू में

वक्त गुजरता है, लम्हे चले जाते कशमकश के पहलू में शाम हो जाती है, मंजर चले जाते उदासी के पहलू में। बैठे ताक रहे थे खिड़की से बाहर अंधेरों को चांदनी नजर […]