Author Archives

Polastya

बुद्धि 

बुद्धिमान बुद्धिमता के अन्तर को न समझ अग्रसर हुए हैं अपनी बातों से प्रभावित कर कंधों पर अग्रसर हुए हैं। संभाल लेना अस्तित्व को अपने कोई गलत काम नहीं गड्ढे खोद दूसरों […]

भवसागर तर जाना

जननी मेरी तुम सर्व प्रथम पूज्यनीय हो मेरे लिए नित्य चरण वन्दन करना तेरा नियम हो मेरे लिए। जीवन यहां यापन हो रहा, कर्म कारण बोध सब है मुझको तुम्हारे समाचार मिलना […]

मिसाले-ए-यार

मुकम्मल कोशिशें जारी रखते हैं जो उन्हे फैज कहा करते हैं किस्मत साथ दे कोशिशें देख जिनकी उन्हे मेरा यार कहा करते हैं।  साथ चले हैं खड़े  सहारा बने एक दूसरे का […]

आदत

दिमाग दौड़ाने की आदत से मजबूर आवाम है यहाँ सिर्फ फायदा उठा लेने की आदत है यहाँ। सभी कर्मो का हिसाब होता इसी जग में कर्मो का फल मिले तो रोने की […]

मेरी माँ मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूँ

सुबह सवेरे उठते ही सारा जग राम राम करे में उठते ही   तुम्हें प्रणाम करता हूँ , ध्यान धर तुम्हारा  हर काम आरम्भ करता हूँ , सभी कुछ अच्छा हो जाता  जब […]

   ज्ञान चक्षु खुल रहे निरन्तर

ज्ञान चक्षु खुल रहे निरन्तर घ्यान धर अग्रसर मै निरनतर कष्ट हुए जो मिथ्या थे बाण सा खींच रहे तुम मुझे परस्पर। तुम धारक तुम ही आभार हो मेरा कभी गांडीव हूँ […]

राम राम 

।। राम राम।। ॐ नमः हनुमंतेय भय भंजनाय सुुखं कूरू फट स्वाहा।।      * “नाम” राम को कल्पतरू , कलि कल्याण  निवास ।        जो सुमिरत भये भाग्य ते […]