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Polastya

simple, humble, ordinary, down to the roots

चिड़िया

तन्हा बैठा था एक दिन मैं अपने मकान में, चिड़िया बना रही थी घोंसला रोशनदान में। पल भर में आती पल भर में जाती थी वो। छोटे छोटे तिनके चोंच में भर […]

बस ऐसे ही

चंद लम्हों में सिमटी जिन्दगी यूँही किताब के पन्नो पर फैली स्याही ज्यूँही तुम पन्नो को फाड़ने की कोशिश न किया करो निकाल दी हमने अफसानो को समभलाते यूँही। ————- इत्तफाक से […]

दोस्तों

इज़हार ख्वाहिशों का जरूरी है दोस्तों सोचते रहने से कुछ मिलेगा, ये जरूरी नहीं है दोस्तों। सफेद रंग पहन लेना जरूरी नहीं दोस्तों काले कपड़ों में भी साफ मिज़ाज़ के लोग मिलते […]

पत्नी की फटकार का महत्व

पत्नी की फटकार सुनी जब, तुलसी भागे छोड़ मकान। राम चरित मानस रच डाला, जग में बन गए भक्त महान।। पत्नी छोड़ भागे थे जो जो, वही बने विद्वान महान। गौतम बुद्ध […]

माँ महाकाली

चतुर्भुज महादेव के हृदय में तुम निवास करती हो उनके चरणों में तेरी शक्ति जैसे साक्षात वास करती हो अंखियों को बंद किए बैठे मेरे महाकाल समाधि में आप स्वयं महामाया बन […]

पायदान

पायदान के बाहर पैर रख कर मुफलिसी के दौर मे दस्तवर खान बिछा कर हम निवाला है बनाते हम उन खुदगरजों को जो आँखे दिखायें आस्तीनो को चढा कर। ———— हमारी मुस्कुराहट […]

जीता रहा इंसान

Not my poetry.. Anonymous writer उल्हजहनोँ मेँ उल्हज कर जीता रहा इंसान जीने का सलीखा अंततक कभी सीखा नहीं उम्रभर अंधेरों से ही सदाँ लड़ता रहा इंसान जलता चिराग हाथ मेँ लेकर […]