Category: Poetry

जब चौथे आयाम से देखा

ज़िंदा थे पर तस्वीरों में पहुँचते देखे कुछ तस्वीरें भी ज़िंदा होती देखीं, कुछ को चलन निभाते देखा कुछ को चलन सिखाते देखा, उलझे हुए को खुश देखा सुखी को उलझते देखा, […]

कई लम्हे इस तरह

समय लाया है कई लम्हे इस तरह सांसे कभी जाती कभी आतीं जिस तरह, ये कशमकश जिदंगी से पहचान बनाती ऐसे हो रहा प्रारम्भ मनचाही उडान का इस तरह, ले हाथों में […]

मंगल भवन अमंगलहारी

बुद्धिमान बने मनुष्य कुछ सत्य-अर्धसत्य की पहचान कुछ अपनी बातों से कर प्रभावित कंधों पर सवार दूसरों के बना रहे पहचान कुछ। गड्ढे खोद दूसरों के लिए सिर ताने हुए हैं गणना […]

ख्वाब 

अश्कों के बहने से जो सैलाब आया था उनमें हमने उस खुदा को पाया था।  ____ रहनुमा बन्ने वाले बहुत मिले हमे गुमराह करना उनकी फितरत पाया था।  ___ जूझते सब्र रखे […]

सहिष्णुता

जीवन के सात रंग यही कहे इंसान कभी ख़ुशी कभी ग़म दगा और इल्ज़ाम यही रास्ते पर चल कर ऊँचा रखे स्थान कहाँ गयी सहिष्णुता क्या कर रहा इंसान । अपनो से […]

पूर्णविराम

जीवन चक्र में फँस उद्वेग में चलता रहा, अर्धसत्य के सत्यापन को पूर्णविराम समझता रहा, इंसान की यही कहानी जीवन चक्र में फँस उद्वेग में चलता रहा। जीवन पथ के उतार चढ़ाव […]

अज्ञानता और ढकोसला

बन्ध रहे पुराने बन्धन रीती रिवाजों के ये सभी मनोरंजन किया ये, न किया वो, तू कैसा है बदजात कर रहा ठीक है, पर बड़ो की नहीं मानी बात कैसे करें पार,  […]