ऑफ़िस के बवाल

पहुँच ऑफ़िस सभी सुनते डाँट नहीं पूरा किया काम है  मानो सारी दुनिया से  कुरुक्षेत्र लड़ने का काम है, पहुँचोगे ना तुम संख नाद तक  तो कटेगी आधी सैलरी  होएग़ी किरकिरी मित्रों में  बजेगी […]

कितना लाचार हूँ मैं

रोज़ सुबह उठ कर दुआ यही करता हूँ  प्रभु के उस दर्शन से  कितनी हुई तकलीफ़ दूर यही समीक्षा करता हूँ । तुम रोज़ उम्मीद की  लौ जगाती हो ,  अपनी परेशानी से  […]

ये लम्हा

कितना अकेला दूर चला आया हूँ मैं रोता सिसकता सा खड़ा था मैं, अंधेरे बरपाए था दूर तलक अपनी छाया से भी अभिग्न था मैं जब साँस छूटेगी ये लम्हा याद आएगा। […]

मित्रों की पीड़ा

श्री हरी  ने जिसको  समझा,  ऐसी पीड़ा  का उल्लेख  करता हूँ, रो नहीं  सकता देख,   वो दर्द  बयान करता  हूँ मित्र की  पीड़ा देख   यूँही खड़ा  रहता हूँ  । क्या करूँ  जब वो  रोता   है,  पीठ थपथपाता  हूँ  यूँही  खड़ा रहता  हूँ राय लेता  है वो,   अनुभव सम्पूर्ण  देता हूँ, मित्र की  पीड़ा देख   यूँही खड़ा  रहता हूँ  […]