यायावर यात्री हैं हम तो, अहर्निश चहुं ओर घूमते

यायावर यात्री हैं हम तो, अहर्निश चहुं ओर घूमते| रस्ते टेढ़े- मेढ़े पर चल,मग में हम भी कभी न रुकते| लाभ-हानि के जन्म-मरण के, चक्रो से कैसे छुटकारा| वादेकर रखे हैं हमने, […]

जब उस बार बुलाया था तुमने

पिछली बार भेजा था शेर  बुलाने सपने में मैं भागा चला आया था, चढ़ा था पहाड़ तुम्हारा  तब पहुँचा जहाँ  आसन तुम्हारा था , वहीं अद्भुत रूप तुम्हारा  पिंडी रूप में विराजी हो  वहीं […]

पितृ छाया

जिसका ध्यान धर दुःख क्षीण हो जाते, स्मरण मात्र से  सुख उपलब्ध हो जाते, सम्मुख होने पर जिसके हो अस्तित्व पर नाज़। वो जिसने  चलना सिखाया, वो जिसने  पढ़ाया लिखाया, वो जो थामे […]

नमन कर मैं चलूँ आगे लेने ब्रह्मज्ञान

एक आँधी सी आयी रहती जीवन में, इनसे बचने को तत्पर है  रहता इंसान, बाल्यकाल में कहते पिता पढ़ लिख ले  अन्यथा उड़ जाएगा  सूखे पत्ते समान, नासमझी में चले थे लड़ने  हो पढ़े-लिखे […]

ग़म-ए-उल्फ़त से बेज़ार आगे चल दिए

उल्फ़तों में दोस्त यूँही  बदनाम हुए हैं, अह्द-ए-उल्फ़त तो  चंद लमहों में सिमटा है, रह-ए-उल्फ़त पे चलने  की गुज़ारिश की थी लगा कर लगाम  हमारे लबों पर  मुस्कुरा कर चल दिए। खोल […]

दोस्ती की ज़ुबान नहीं होती

बेगुनाहों की तक़दीर में  ठोकरें ज़रूर हैं, पर बेगुनाहों की तस्वीर  मैले नहीं होती, वक़्त पलटते देर नहीं लगती  पलट जाते हैं लोग जब तक़दीर नहीं होती। तुम भी किस  कस्मक़स में फँस […]

वक़्त करवट बदलता है आवाज़ नहीं होती

वक़्त करवट बदलता है आवाज़ नहीं होती, वो आग़ाज़ करता है तो आवाज़ नहीं होती । हम झेलते हुए मार वक़्त की ताक़त को देखते हैं वक़्त जब ना हो साथ ज़ोर-ए-परवाज़ […]