*चाय सिर्फ़ चाय ही नहीं होती…*✍🏻

जब कोई पूछता है “चाय पियेंगे” तो बस नहीं पूछता वो तुमसे दूध, चीनी और चायपत्ती को उबालकर बनी हुई एक कप चाय के लिए।✍🏻 वो पूछता हैं… क्या आप बांटना चाहेंगे कुछ चीनी सी मीठी यादें कुछ चायपत्ती सी कड़वी दुःख भरी बातें..!✍🏻 वो पूछता है.. क्या आप चाहेंगे बाँटना मुझसे अपने कुछ अनुभव, […]

उसका

राम उसका रावण भी उसका फिर भी संसार का भाव नहीं उसका, जीवन उसका मरण भी उसका इंसान की समझ में अस्तित्व नहीं उसका, तांडव उसका ध्यान भी उसका योग और अभ्यास का सार नहीं उसका, ज्ञानियों का ज्ञान उसका, प्रेतों का महाकाल उसका चन्द्रमा का आधार भी उसका संसार का भेद फिर भी नहीं […]

मजबूर कर दो

हमें सीने से लगाकर हमारी सारी कसक दूर कर दो, हम सिर्फ तुम्हारे हो जाऐ हमें इतना मजबूर कर दो। तनहाई में तड़पा करें मोहब्बत की तासीर इतनी तेज़ कर दो, तुम्हारी हर अंगड़ाई की याद आए हमे इतना मजबूर कर दो । कोशिशें बेकार जाया करती हैं हमारी मुश्किलें दूर कर दो, तुम्हारी यादों […]

मधुराष्टकं

अधरं मधुरं वदनं मधुरं नयनं मधुरं हसितं मधुरम् । हृदयं मधुरं गमनं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥ १ ॥ वचनं मधुरं चरितं मधुरं वसनं मधुरं वलितं मधुरम् । चलितं मधुरं भ्रमितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥ २ ॥ वेणु-र्मधुरो रेणु-र्मधुरः पाणि-र्मधुरः पादौ मधुरौ । नृत्यं मधुरं सख्यं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥ ३ ॥ गीतं मधुरं पीतं मधुरं […]

*_मुंशी प्रेमचंद जी की एक सुंदर कविता_*

🐋 _ख्वाहिश नहीं मुझे_ _मशहूर होने की,”_ _आप मुझे पहचानते हो_ _बस इतना ही काफी है।_ _अच्छे ने अच्छा और_ _बुरे ने बुरा जाना मुझे,_ _जिसकी जितनी जरूरत थी_ _उसने उतना ही पहचाना मुझे!_ _जिन्दगी का फलसफा भी_ _कितना अजीब है,_ _शामें कटती नहीं और_ _साल गुजरते चले जा रहे हैं!_ _एक अजीब सी_ _’दौड़’ […]