मैं हूँ

देखा है मैने सब,  उत्त्पती से विनाश तक मै ही आदी, अन्त भी मै हूँ,  रचनाकार मै भोग और भोगी भी मै हूँ,  सरल स्वभाव मै भाव का अर्थ भी मै हूँ,  […]

मित्र! ओ मित्र 

इच्छाओं से उत्पन्न हो हंसी की रचना करते हो तुम, मेरे दृष्टिकोण को जान कर सार्थक करते हो तुम, मेरी इचछाओं के अनूकूल रचनात्मक हो दिखते हो तुम| ज्ञान विज्ञान से परिपूर्ण […]

वक्त गुजरता है देर नहीं लगती

बदल जाता है समा, और वक्त गुजरते भी देर नहीं लगती कभी मुस्कराये थे तुम किसी पर,  जहाँ तुम पर हंसे, इसमे देर नहीं लगती।  …. यहाँ नूर बरसते हैं उसके बन्दों […]

कौन

मैं रूठा ,तुम भी रूठ गए फिर मनाएगा कौन ? आज दरार है , कल खाई होगी फिर भरेगा कौन ? मैं चुप , तुम भी चुप इस चुप्पी को फिर तोडे़गा कौन ? छोटी बात को […]

ख्वाब 

अश्कों के बहने से जो सैलाब आया था उनमें हमने उस खुदा को पाया था।  ____ रहनुमा बन्ने वाले बहुत मिले हमे गुमराह करना उनकी फितरत पाया था।  ___ जूझते सब्र रखे […]

 तू रख चित्त शांत और हावभाव में प्यार

चक्रवात सा आया है सब धुमिल सा हुआ है ठूंठता किसे नजर नहीं कुछ आता   हाथ प्रभू का बस पकडे़ है।  —- सन्दर्भों में बीते हैं साल पीड़ा में है तुम्हारा लाल […]

पिता श्री – आपका आगमन 

अंग्रेजों के बनाये कुछ त्योहार भी अच्छे होते हैं रिश्तों में पिरोए हुए त्योहार अच्छे होते हैं  आज father’s day पर आपका आगमन मेरे यहाँ  ऎसे आशिर्वाद के सूचक भी बहुत अच्छे […]