कहाँ है वो जगह जहाँ सुकून-ए-जहाँ मिलते हैं

कहाँ है वो जगह जहाँ सुकून-ए-जहाँ मिलते हैं दिखाते सभी वो मंज़र, जहाँ सभी मसरूफ मिलते है । हम भी निकले हैं उस गुरु की खोज में कहते हैं शरण में उसकी, […]

सहिष्णुता

जीवन के सात रंग यही कहे इंसान कभी ख़ुशी कभी ग़म दगा और इल्ज़ाम यही रास्ते पर चल कर ऊँचा रखे स्थान कहाँ गयी सहिष्णुता क्या कर रहा इंसान । अपनो से […]

पूर्णविराम

जीवन चक्र में फँस उद्वेग में चलता रहा, अर्धसत्य के सत्यापन को पूर्णविराम समझता रहा, इंसान की यही कहानी जीवन चक्र में फँस उद्वेग में चलता रहा। जीवन पथ के उतार चढ़ाव […]

अज्ञानता और ढकोसला

बन्ध रहे पुराने बन्धन रीती रिवाजों के ये सभी मनोरंजन किया ये, न किया वो, तू कैसा है बदजात कर रहा ठीक है, पर बड़ो की नहीं मानी बात कैसे करें पार,  […]

माँ तू कहाँ खो गयी

माँ तू कहाँ खो गयी मेरी आँख कल नम हों गयी  जूझता समय से मै अधमरा हुआ हूँ  जिन्दगी समय के तूफान में खो गयी।  —- मै निकला उस डगर जो दिखाई […]

उल्लेखनीय

इस जीवन की यही कहानी , कुछ नयी कुछ पुरानी करते सभी यहाँ कुछ प्रयास ढूँढते रहते एक आस, क्या करें ऐसा जिसे देख आयें सभी पास, उल्लेखनीय हो कर्म ऐसा ये […]

आभार

तेरे प्यार का और तेरे दुलार का, इस संसार में और पर लोक में, दया दृष्टि तेरी हमारी तरफ वो मुस्कान तेरी, जीवन खुशियों से भर देती सभी दुख हर लेती, तू […]